हमेशा मीडिया की सुर्खियों में रहे हैं स्वामी रामदेव

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        शिबली रामपुरी

योग गुरु स्वामी रामदेव किसी पहचान के मोहताज नहीं है. उन्होंने भारत में पतंजलि नाम की एक कंपनी खड़ी की है जिसका डंका देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी बज रहा है. इसके अलावा योग गुरु बाबा रामदेव अक्सर विभिन्न टीवी चैनलों पर भी अपने विचार व्यक्त करते हुए नजर आते हैं इसके अलावा वह ऐसे बयान भी देते रहते हैं ताकि मीडिया की नजर उन पर बनी रहे. आज मीडिया की सुर्खियों में रहने वाले बाबा रामदेव ने किसी समय काफी संघर्ष करके पतंजलि कंपनी को खड़ा किया था.
भारत की मशहूर हिंदी पत्रिका आउटलुक के मुताबिक 1995 में पतंजलि का कंपनी के रूप में रजिस्ट्रेशन हुआ था. उस समय महज 13000 रूपये में रामदेव और उनके सहयोगी आचार्य बालकृष्ण ने पतंजलि का रजिस्ट्रेशन कराया था बताया जाता है कि दोनों के पास उस समय सिर्फ पैतीस सौ रूपये थे और बाकी के पैसे उन्होंने दोस्तों से उधार लिए थे. आज भी वह समय याद है कि जब कुछ मशहूर समाचार पत्रों में स्वामी रामदेव के जगह-जगह लगाए गए योग शिविरों के पूरे पूरे पेज प्रकाशित हुआ करते थे और उसमें दिखाया जाता था कि उनके शिविर में कितनी भीड़ जुटती है और रामदेव शिविर आयोजित कर बाल काले रखने और स्वास्थ्य का पूरा ध्यान रखने संबंधी टिप्स भी योग शिविर में दिया करते थे. जब रामदेव ने यूपी के कुछ बड़े जिलों में योग शिविर आयोजित किए. उस समय लोगों में योग के प्रति एक क्रेज बन गया और काफी संख्या में लोग शिविरों में जाने लगे. जिससे स्वामी रामदेव की लोकप्रियता बढ़ती गई और उनकी आमदनी भी. बताया जाता है कि शिविरों की शुरुआत हरियाणा के गांव से हुई थी और वहां से होती हुई गुजरात दिल्ली यूपी आदि तक योग शिविरों का आयोजन रामदेव करने लगे और फिर रामदेव ने पीछे मुड़कर नहीं देखा. बाबा रामदेव ने देश के साथ-साथ विदेश में भी जोर शोर से योग शिविर लगाने शुरू कर दिए. बाबा रामदेव के योग शिविर में शुरू में तो कुछ दो सौ- ढाई सौ लोग ही आते थे लेकिन जैसे-जैसे उनकी लोकप्रियता में इजाफा होता गया तो उनके शिविरों में हजारों से लेकर लाखों लोग तक भी पहुंचने लगे. भारत में योग को प्रोत्साहन देने और बढ़ावा देने में स्वामी रामदेव का अहम रोल रहा है.योग गुरु बाबा रामदेव ने एक बार बताया था कि उनको पहली बार पचास हजार रूपये का दान मिला था जो उस समय उनके लिए एक बहुत बड़ी रकम थी,उस पैसे से उन्होंने आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों का कारोबार शुरू किया था जो आज हजारों करोड़ रुपए तक पहुंच चुका है. इसमें कोई दो राय नहीं है कि रामदेव ने यहां तक पहुंचने के लिए काफी संघर्ष किया है और उसी संघर्ष के बूते वह यहां तक पहुंचे हैं.योग गुरु स्वामी रामदेव वैसे तो कभी खुलकर राजनीति में नहीं आए और ना ही उन्होंने कभी चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर की लेकिन आईने की तरह साफ है कि स्वामी रामदेव का रुझान हमेशा भाजपा की ओर रहा है और खास तौर पर पीएम नरेंद्र मोदी के तो वह काफी शुभचिंतक रहे हैं और आज भी पीएम मोदी की तारीफों के पुल बांधते रहते हैं.

वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान भी स्वामी रामदेव ने कई तरह की घोषणा की थी कि यदि मोदी प्रधानमंत्री बनते हैं तो विदेशों में जमा काला धन बहुत जल्दी आ जाएगा और देश की तरक्की में लगेगा आदि इस तरह की बातें स्वामी रामदेव ने उस दौरान बहुत की थी और आज भी बाबा रामदेव किसी ना किसी तरह के बयान देकर मीडिया की सुर्खियों में बने रहते हैं.
वर्तमान समय में स्वामी रामदेव इसलिए चर्चाओं में है कि उन्होंने अपनी आयुर्वेदिक कंपनी पतंजलि द्वारा कोरोनावायरस के खिलाफ दवाई बनाने का ऐलान कर दिया है. स्वामी रामदेव के मुताबिक उन्होंने कोरोनिल टैबलेट बनाई है.जो कोरोना के मरीजों को सौ फीसदी सही करती है. ऐसा रामदेव ने दावा किया है.जाहिर सी बात है कि जब दुनिया के ज्यादातर देश कोरोना के संक्रमण से जूझ रहे हैं और काफी बड़ी संख्या में कई देशों में तो मौतें भी हो रही है तो ऐसे में हर किसी की यही निगाह लगी हुई है कि जल्दी से जल्दी कोरोना की दवा सामने आए. स्वामी रामदेव जिस तरह से दवा बनाने का ऐलान किया है. उसको लेकर रामदेव विवादों में आ गए हैं और सवाल खड़े हो रहे हैं कि आखिर रामदेव ने इतनी जल्दी कैसे कोरोनावायरस जैसे खतरनाक वायरस की दवाई तैयार कर दी. इसमें विवाद को हवा और ज्यादा इसलिए भी मिली है क्योंकि यह बात भी सामने आई है कि रामदेव ने इम्युनिटी बढ़ाने आदि के लिए इजाजत मांगी थी और बना डाली कोरोना की दवा.
इससे पहले भी कई बयानों के वजह से रामदेव सुर्खियों में रह चुके हैं. जब केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी तब दिल्ली में रामदेव ने कांग्रेस के खिलाफ रामलीला मैदान में प्रदर्शन किया था और उस प्रदर्शन के दौरान रामदेव काफी विवादों और चर्चाओं में आ गए थे. बहरहाल फिलहाल अब देखना यह है कि स्वामी रामदेव ने कोरोनिल दवाई ईजाद की है वह कितनी कारगर साबित होती है और क्या सरकार की ओर से उस दवा को जनता तक पहुंचाने की कोई छूट मिलती है हालांकि जिस तरह के हालात बने हुए हैं उसको देखकर तो यही लगता है कि सरकार की ओर से रामदेव द्वारा बनाई गई दवा जनता तक नहीं पहुंच सकेगी. देश के कई बुद्धिजीवी वर्ग इस बात से इत्तेफाक नहीं रखते कि रामदेव ने कोरोना जैसे खतरनाक वायरस की दवा बना दी है. खुद आयुष मंत्रालय भी रामदेव के दावों से इत्तेफाक नहीं रखता है.

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