सोशल मीडिया और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता

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(शिबली रामपुरी)
मौजूदा दौर में हम सोशल मीडिया की अहमियत को किसी तरह भी नजरअंदाज नही कर सकते हैं।देश की एक बडी आबादी खास तौर युवाओं की बडी संख्या सोषल मीडिया से जुडी हुई हैं।जिनमें ऐसे युवाओं की कोई कमी नही हैं कि जो सुबह से लेकर रात को उस समय तक सोशल मीडिया से जुडे रहते हैं कि जब तक उनको नींद नही आ जाती।सोशल मीडिया ने जहां अपनी बात कहने का जनता को एक मंच प्रदान किया हैं तो वही इसके नुकसान की भी हम अनदेखी नही कर सकते हैं।सोषल मीडिया के माध्यम से कुछ सरफिरे लोग जहां किसी ना किसी तरह की अफवाह फैलाकर माहौल को खराब करने का प्रयास करते हैं तो वहीं कुछ लोग सोषल मीडिया पर भावनात्मक पोस्ट कर अपनी घटिया राजनीति चमकानें का प्रयास करते हैं।कई बार तो ऐसे मामले भी सामने आ चुके हैं कि किसी देष का पोस्ट सोशल मीडिया पर अपलोड करके उसे यहां की बताकर लोगों के जज्बात भडकाने की कोषिष नफरत फैलाने वालों ने की और जब तक ये बात समझ में आई कि ये यहां की नही बल्कि किसी और देश की हैं तो तब तक काफी देर हो चुकी थी और माहौल को बेहतर बनाने के के लिए अमनो अमान कायम करने के लिए पुलिस प्रषासन को काफी मषक्कत करनी पडी तब जाकर माहौल बेहतर हो सका।कई बार किसी मामूली बात को इतना तूल दे दिया गया कि दोनो समुदाय के वो लोग एक दूसरे के सामने आ डटे कि जो कभी एक दूसरे के सुख दुख में हमेषा षरीक रहते थे।उनको समझाने में अमन पसंद लोगों और पुलिस प्रषासन को काफी मषक्कत करनी पडी।सोषल मीडिया के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए सरकार काफी प्रयास कर रही हैं।सरकार के ये प्रयास काबिले तारीफ तो हैं मगर इसमें पूरी तरह से तभी सफलता मिल सकती हैं जब इसमें सामाजिक संगठनों को भी आगे आकर सरकार के साथ कदम मिलाना होगा।हमारे देष में ऐसे लोगों की भी कोई कमी नही हैं कि जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की दुहाई ऐसे मामलों में भी देने लगते हैं कि जिसमें अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर किसी मजहब के मानने वालों की भावनाओं को भी ठेस पहुंचाई जाने लगती हैं।जबकि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की भी एक सीमा होती हैं।जिसे किसी भी तरह से लांघा नही जा सकता हैं।भारत एक लोतांत्रिक देष हैं और लोकतंत्र में सबको अभिव्यक्ति की आजादी का हक हासिल हैं।लेकिन लोकतंत्र में इसका दायरा भी तय किया गया हैं।जो लोग सोषल मीडिया पर कोई पोस्ट करके या फिर कोई किताब लिखकर किसी भी मजहब के मानने वालों के खिलाफ अपनी गलत मानसिकता को पेष करते हैं।जब उनके इस गलत कार्य की समाज में निंदा होती हैं तो फिर वो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रहार की बात करने लगते हैं।लेकिन वो ऐसा करते समय ये भूल जाते हैं कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर उस भारतीय संस्कृति का ध्यान रखा जाना और सम्मान किया जाना जरूरी हैं कि जो अमनो अमान का पैगाम देती हैं।यही बात सोषल मीडिया पर भी लागू होती हैं।सोषल मीडिया का बेहतर इस्तेमाल अमनो अमान के जज्बे को और ज्यादा बढाने में अहम रोल निभा सकता हैं तो गलत इस्तेमाल अमनो अमान को पलीता भी लगा सकता हैं।इसलिए सोशल मीडिया का सही इस्तेमाल जरूरी हैं।

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