साहित्य के गिरते स्तर को बचाने की जरूरत

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(शिबली रामपुरी)

देश में जो अहमियत और सम्मान फिल्मी कलाकारों से लेकर क्रिकेटरों तक को हासिल हैं।वैसा लेखकों,साहित्यकारों को नसीब नही हैं।इस मामलें में हमारी फिल्मी दुनिया का रवैया भी किसी तरह से बेहतर नही हैं।जब भी कोई फिल्म अपार सफलता हासिल करती हैं तो उस फिल्म के अभिनेता अभिनेत्री से लेकर आवाज देने वाले सिंगर से लेकर फिल्म के निर्देशक तक को काफी प्रशंसा और पब्लिसिटी मिलती हैें लेकिन फिल्म लेखकों और उसके गीत लिखने वालों को वो सम्मान और अहमियत नही मिलती कि जिसके वो हकदार होते हैं।यही कारण हैं कि आज बालीवुड में अच्छे और संदेशात्मक गीत लिखने वालों की काफी कमी सी हो गई हैं।हर किसी की चाहत एक अच्छा एक्टर और निर्देशक बनने की तो होती हैें लेकिन जल्दी से कोई लेखन की ओर कदम नही बढा पाता हैं।फिल्मों के अलावा इसी तरह का दोहरा रवैंया लेखकों और साहित्यकारों के साथ फिल्मी दुनिया से बाहर भी किया जाता हैं।कुछ चंद साहित्यकारों को साल में एक या दो बार सरकारी स्तर पर प्रोत्साहित कर दिया जाता हैं।एक कडवी हकीकत के मुताबिक सरकार से कई बार ऐसे लोग भी साहित्य के नाम पर सम्मान पा जाते हैं कि जिनका साहित्य जगत में उतना योगदान नहीं होता हैं कि जितना उनको सरकार की ओर से सम्मान दे दिया जाता हैं।यूपी की पूर्व की सरकार में तो कुछ ऐसे चेहरे यश भारती सम्मान हासिल कर गए कि लोगों को उनको ये सम्मान मिलने पर हैरत हुई और अफसोस हुआ कि ये सब क्या हो रहा हैं।यहां तक कहा गया कि सरकार में बैठे लोगों की जी हुजूरी के कारण ये सम्मान अयोग्य व्यक्ति को दिया गया हैं।इसी तरह के कुछ अन्य कारणों की वजह से भी साहित्य का दायरा सिमटता जा रहा हैं या फिर स्तर गिरता जा रहा हैं।हालांकि फिल्मों मे लेखन के गिरते स्तर का एक प्रमुख कारण कुछ लोग आज के फिल्म लेखकों,गीतकारों को उर्दू का ज्ञान ना होना भी बताते हैं।फिल्म समीक्षक कमल देवबंदी इस बारें में कहते हैं कि पहले फिल्म की कहानी से लेकर गीत लिखने वालों को उर्दू का ज्ञान होता था जो उनके लेखन में साफ झलकता था।यहां तक कि यदि किसी कवि या फिल्म राइटर को अगर उर्दू नही आती थी तो वो उर्दू का ज्ञान हासिल करता था।लेकिन आज हालात काफी बदल चुके हैं।अब तो बालीवुड में ऐसे ऐसे लोग फिल्म की कहानियां या गीत लिखते हैं कि जिनको जहां उर्दू का तो ज्ञान होता ही नहीं हैं वहीं वो साहित्यिक तौर पर भी ज्यादा परिपक्व नहीं होते हैं।जिसके कारण अब ना तो फिल्मों में बेहतरीन कहानी होती हैं और ना ही गीतों में वो पहले जैसी मिठास होती हैं यही वजह हैं कि किसी फिल्म के गीत कब आते हैं और कब चले जाते हैं पता ही नहीं चलता हैं।इसमें कोई दो राय नहीं हैं कि आज बालीवुड में अच्छे लेखकों और गीतकारों का अभाव हैं।जावेद अख्तर,गुलजार आदि चंद नामों को छोडकर बालीवुड में ऐसे लोग नहीं रह गए हैं कि जो काबिले तारीफ लिख सकते हों।वैसे तो बालीवुड में आए दिन ही कुछ नये चेहरें सामने आते रहते हैं कि जो फिल्मों की कहानियां और गीत लिखते हैं अब वो क्या और कैसा लिखते हैं ये किसी से छुपा नही हैं।एक समय हुआ करता था कि जब शकील बदायुंनी,साहिर लुधयानवी,कैफी आजमी,आनंद बख्शी जैसे लोग फिल्मों में गीत लिखा करते थे उनकी कलम से निकले गीतों का मेयार आज भी कायम हैं।हालांकि उस दौर में और आज के दौर में जहां काफी अंतर हैं वहीं एक समानता ये हैं कि उस दौर में भी लेखकों को फिल्म के बाकी लोगों अभिनेता,अभिनेत्री और सिंगरों की तरह वो प्रोत्साहन नहीं मिल पाता था।इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता हैं कि उस दौर के कई गीतकारों की मौत के बाद उनके घरवालों को जीवन यापन के लिए काफी कठिानाईयों का सामना करना पडा था।हालात आज भी ज्यादा अलग नही हैं।आज भी गीतकारों,लेखकों को अभिनेताओं और अभिनेत्रियों,गायकारों की तरह वो प्रोत्साहन नहीं मिल पाता हैं जो उनको मिलना चाहिए।फिल्मी दुनिया से बाहर भी लेखकों को वो स्थान वो सम्मान हासिल नही हैं कि जो उनको होना चाहिए।कितना बेहतर हो कि सरकार की ओर से लेखकों को हर साल सम्मानित करने के लिए कुछ कदम उठाए जाएं और हर जिलें क ेलेखकों,साहित्यकारों को प्रोत्साहित किया जाए।दूसरी ओर वरिष्ठ साहित्यकारों को भी चाहिए कि वो उभरते शायरों,कवियों,लेखकों का मार्गदर्शन कर उनकी हौसला अफजाई करें।क्योकि अक्सर हमने कई जगहों पर ऐसा देखा हैं कि वहां पर कोई साहित्यिक कार्यक्रम आयोजित किया जाता हैं और उसमें दूर दूर से साहित्यकारों को तो बुलाकर सम्मानित किया जाता हैं लेकिन स्थानीय साहित्यकारों को नजरअंदाज कर दिया जाता हैं।यहां तक कि कार्यक्रम में उनको आमंत्रित तक नही किया जाता हैं।ऐसे हालात में गंभीरता से सोचने की बात हैं कि किस तरह से साहित्य के गिरते स्तर को बचाया जा सकता हैं और कैसे साहित्य की सेवा की जा सकती हैं।साहित्य के वर्तमान समय में गिरते स्तर के लिए कुछ साहित्यकार भी कम जिम्मेंदार नही हैं.

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