राहुल आज भी कायम हैं अपने फैसले पर

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पार्टी नेताओं के तमाम प्रयासों के बावजूद भी नहीं माने राहुल-आज भी कायम है अपने फैसले पर

(शिब्ली रामपुरी)
इसमें कोई दो राय नहीं है कि कांग्रेस पार्टी के अधिकतर नेता चाहते हैं कि राहुल गांधी को फिर से कांग्रेस के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभालनी चाहिए. लेकिन पार्टी नेताओं के तमाम प्रयासों के बावजूद भी राहुल गांधी अपने फैसले पर अभी भी क़ायम हैं. सोनिया गांधी को कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष के रूप में एक साल पूरा हो गया है. माना जा रहा था कि राहुल गांधी अगस्त माह में कांग्रेस की कमान संभाल लेंगे लेकिन ऐसा नहीं हो सका. राहुल गांधी कांग्रेस को मजबूत करते और अपनी छवि कुछ अलग तरीके की बनाते हुए तो जरूर दिखाई देते हैं लेकिन उन्होंने अभी तक कोई ऐसा इशारा नहीं दिया है जिससे यह साफ हो सके कि वह कांग्रेस की कमान एक बार फिर से अपने हाथों में ले लेंगे. वैसे तो पार्टी में ज्यादातर फैसले राहुल गांधी की मर्जी से ही होते हैं लेकिन पार्टी नेता चाहते हैं कि राहुल गांधी कांग्रेस के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभाले और फिर पूरी मजबूती के साथ कांग्रेस को मजबूत करने के प्रयासों में जुट जाएं. मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और शशि थरूर जैसे नेता कई बार ऐसे बयान दे चुके हैं जिससे साफ इशारा मिलता है कि पार्टी के अधिकतर नेता राहुल गांधी को अध्यक्ष के तौर पर देखना चाहते हैं. हालांकि राहुल गांधी ने जब कांग्रेस के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया था तब यह बात कही जा रही थी कि कांग्रेस पर जो वंशवाद की सियासत के आरोप लगते रहे हैं कांग्रेस उस छवि से बाहर निकलना चाहती है और किसी बाहरी कांग्रेसी को पार्टी अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी जा सकती है.उस दौरान कई ऐसे नाम प्रमुखता से लिए गए थे कि जिनके बारे में माना जा रहा था कि इनमें से किसी एक को पार्टी के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी दी जा सकती है. लेकिन नेहरू परिवार से बाहर पार्टी अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी किसी नेता को दिए जाने के मामले पर पार्टी के सभी नेता एकजुट नहीं है लेकिन राहुल गांधी को एक बार फिर से कांग्रेस के अध्यक्ष पद की कमान संभालनी चाहिए इसको लेकर पार्टी के सभी नेता एकजुट नजर आते हैं. यही वजह है कि कांग्रेस में राहुल गांधी को अध्यक्ष बनाओ की आवाज लगातार बुलंद हो रही है. राहुल गांधी लगातार केंद्र सरकार और भाजपा पर बयानबाजी करते हुए दिखाई देते हैं तो दूसरी ओर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी भी राजनीति में पूरी तरह से सक्रिय होकर पार्टी को मजबूत करने की दिशा में प्रयासरत हैं और उनके यह प्रयास रंग भी ला रहे हैं लेकिन अभी तक यह कहना काफी कठिन है कि कांग्रेस अपने सबसे खराब दौर से निकलने की ओर कदम रख चुकी है क्योंकि पार्टी में अंदरूनी गुटबाजी भी कम नहीं है. जिसकी झलक मध्यप्रदेश और राजस्थान की सियासत में देखी जा चुकी है. ऐसे में कांग्रेस को एक मजबूत नेतृत्व की जरूरत है और पार्टी के नेता वो मजबूत नेतृत्व राहुल गांधी में देख रहे हैं लेकिन राहुल गांधी इस पर पूरी तरह से चुप्पी साधे हुए हैं. वैसे तो सियासत के जानकार कहते हैं कि राहुल गांधी का अध्यक्ष बनना तो लगभग तय है लेकिन वह कब बनेंगे यह कहना अभी जल्दबाजी होगी.

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