रविश कुमार को अवार्ड और पत्रकारिता

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(शिबली रामपुरी)

रविश कुमार को रेमन मेग्सेसे अवार्ड मिलना कोई मामूली बात नही है वो भी ऐसे दौर में कि जब मीडिया का एक बडा तबका जनता की उम्मीदों पर खरा उतरता नजर नही आता है।मीडिया बेशक एक ताकत है आम आदमी की उस गरीब की आवाज को उठाने का एक माध्यम है कि जो किसी ना किसी तरह से पीडित है और अपने लिए न्याय चाहता है।लेकिन ये भी हकीकत है कि आजादी के बाद से हाल फिलहाल के कुछ सालों में मीडिया का स्तर जिस तरह से गिरा है।उसने हर किसी को काफी कुछ सोचने पर मजबूर कर दिया है।रविश कुमार को अवार्ड किस योग्यता पर मिला यदि इसका जवाब तलाष किया जाए तो यही एक बात हर किसी की जबान पर आती है कि सच बोलने और सच दिखाने की वजह से रविष कुमार को ये अवार्ड मिला है।जहां से ये अवार्ड दिए जाने का ऐलान किया गया है वहां से रविष कुमार को अवार्ड दिए जाने की जो वजह बताई जा रही है वो पढकर साफ हो जाता है कि ईमानदारी की कद्र करने वालों का भी समाज में बल्कि हर क्षेत्र में सम्मान उनका वकार अभी बरकरार है और जनता भी मीडिया से यही उम्मीद करती है जिस पर रविष कुमार खरे उतरते चले आ रहे हैं।रविष कुमार को हालांकि सच के इस रास्तें में काफी कठिनाईयों का भी समय समय पर सामना करना पडा और उनके परिवार के सामने भी काफी दिक्कतें रविष की वजह से आई लेकिन रविष अपना राह पर डटे रहे और उम्मीद है हमेषा डटे रहेंगे।रविश कुमार को अवार्ड मिलने के बाद सोशल मीडिया पर जहां रविष कुमार को बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है वहीं ऐसे लोगों की भी कोई कमी नही है कि जो रविश कुमार को ये अवार्ड दिए जाने पर सवाल खडे कर रहे हैं और ऐतराज जता रहे हैं दरअसल ये वो लोग हैं कि जिनको सत्ता से सवाल करना पसंद नही है और यही वजह है कि वो हमेषा से रविष कुमार और उन जैसे पत्रकारों पर निषाना लगाते रहते हैं।क्योकि रविष कुमार जैसे पत्रकार सत्ता से सीधे सवाल करते हैं लेकिन अफसोस के साथ कहना पडता है कि आज मीडिया का एक बडा तबका सत्ता की बजाय विपक्ष पर सवालों की बौछार करता नजर आता है।ये वो मीडिया है कि जो रोजाना ही षाम होते ही हिन्दू मुस्लिम मुददों पर या फिर ऐसे मामलों पर डिबेट कराता है कि जिनसे जनता को कोई सरोकार नही होता और जिनसे जनता का कोई भला भी नही होने वाला होता है।लेकिन फिर भी ऐसे मामलों पर डिबेट कराई जाती है।आज यही वजह है कि कुछ राजनीतिक पार्टीयोें और कुछ लोगों ने तो टीवी चैनलों पर होने वाली डिबेट से किनारा कर लिया है।क्योकि इन चैनलों पर जो एंकर डिबेट कराते हैं वो सत्ता पक्ष की तरफ झुकाव रखते साफ नजर आते है।जिससे साफ अहसास होने लगता है कि यहां डिबेट की बजाय कुछ और ही हो रहा है।मीडिया के ऐसे नजरिये से आम आदमी की उम्मीदें टूटती हैं।लेकिन मीडिया का बडा तबका इससे कोई सबक लेने को तैयार नही है।ऐसे में रविष कुमार जैसे सत्ता से सवाल करने वाले और षिक्षा और रोजगार के मुददे जोरदार तरीके से उठाने वाले पत्रकार को इतने बडे अवार्ड से सम्मानित किया जाना काफी अहमियत रखता है और उन लोगों में एक हिम्मत और जज्बा पैदा करता है कि जो अपना काम ईमानदारी से कर रहे हैं और उनको इसी वजह से परेषानी भी उठानी पड रही है।ऐसे पत्रकारों का हौसला बढाता है रविश कुमार को मिलने वाला ये सम्मान।

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