प्रियंका जैसी महिलाएं घरेलू हिंसा अधिनियम का दुरूपयोग करती हैं–ऐसी महिलाएं समाज के लिए कलंक

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ग्वालियर: प्रिंयका ने थाटीपुर थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी कि सुमित से मेरी शादी 20 फरवरी 2015 को सुमित पुत्र राकेश के साथ हुई थी औैर अगले दिन से ही पति, ससुर, ममिया ससुर, सास व जेठ द्वारा 10 लाख रुपए दहेज में अलग से लाने के लिए दवाब बनाया जाने लगा और मारपीट की जाने लगी। मुझे 18 जून 2016 को मारपीट कर घर से निकाल दिया गया था।अपनी जिद न मानने पर ससुराल पक्ष के लोगों पर दहेज एक्ट, घरेलू हिंसा का केस दर्ज कराने वाली महिला को गलत ठहराते हुए जेएमएफसी शिवांगी श्रीवास्तव ने टिप्पणी की है कि सामाजिक स्थिति को देखते हुए यह सामने आता है कि एक ओर जहां घरेलू हिंसा से वास्तविक रूप से प्रताड़ित एवं पीड़ित महिलाएं न्यायालय नहीं पहुंच पाती। वहां प्रियंका जैसी महिलाएं घरेलू हिंसा अधिनियम का दुरूपयोग करती हैं। आरोपीगण पर दवाब बनाने के लिए इस प्रकार घरेलू हिंसा अधिनियम के प्रावधानों का उपयोग दुरायपूर्ण तरीके से अपनी शर्तों को मनवाने के लिए करती हैं। ऐसी महिलाएं वास्तवित रूप से पीड़ित महिलाओं के समक्ष कलंकात्मक उदाहरण हैं। जेएमएफसी द्वारा इस मामले में आरोपी बनाए गए राकेश आर्य, नारायणदास कटारिया, सुमित आर्य, विमला आर्य, नवीन आर्य को बरी कर दिया गया है। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि फरियादी प्रियंका ने आरोपियों के खिलाफ झूठा केस दर्ज कराया। जिसे प्रियंका ने खुद स्वीकार करते हुए कोर्ट को बताया कि मुझसे ससुराल पक्ष के लोगों का दहेज को लेकर कोई विवाद नहीं था। विवाद इस बात का था कि पति सुमित मुझे गर्भावस्था में कहीं भी आने जाने से रोकता था।

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