पार्टी में तेज होने लगी है राहुल को अध्यक्ष बनाने की मांग

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क्या वंशवाद के आरोपों से घबराकर राहुल गांधी नहीं संभाल रहे हैं कांग्रेस की कमान?

पार्टी में तेज होने लगी है राहुल को अध्यक्ष बनाने की मांग
(शिब्ली रामपुरी)
वर्तमान समय में केंद्र एवं भारत के अधिकतर राज्यों में सत्तासीन भाजपा अक्सर कांग्रेस पर आरोप लगाती रही है कि वह वंशवाद की राजनीति से बाहर नहीं निकल सकी है. भाजपा का ये आरोप रहा है कि कांग्रेस के अध्यक्ष नेहरू खानदान से ही बने हैं. जबकि यह पूरी तरह से सच नहीं है कई ऐसे नेता भी रहे हैं पार्टी के अध्यक्ष जो नेहरू खानदान के नहीं थे. लेकिन यह बात भी अपनी जगह कायम है कि ज्यादातर पार्टी अध्यक्ष के तौर पर कांग्रेस की कमान नेहरू परिवार के हाथ में ही रही है. जिस समय राहुल गांधी ने पार्टी के अध्यक्ष पद को अलविदा कहा था तब यह कयास लगाए जा रहे थे कि अब पार्टी का नेतृत्व कोई बाहरी करेगा. किसी ऐसे नेता को मौका मिलेगा जो नेहरू खानदान से बाहर का होगा. उस दौरान कई कांग्रेसी नेताओं के नाम चर्चा में भी थे. लेकिन आखिर वही हुआ जो आरोप भाजपा लगाती रही है एक बार फिर से कार्यकारी अध्यक्ष के तौर पर सोनिया गांधी को चुन लिया गया और तभी से सोनिया गांधी ही पार्टी की कमान संभाल रही हैं. लेकिन समय-समय पर कांग्रेस के अंदर यह मांग उठती रही है कि राहुल गांधी को जिम्मेदारी लेते हुए कांग्रेस के अध्यक्ष पद को सुशोभित करना चाहिए क्योंकि पार्टी को उनके जैसे लीडर के नेतृत्व की वर्तमान समय में सख्त जरूरत है. हालांकि दूसरी तरफ प्रियंका गांधी को भी पार्टी अध्यक्ष बनाने की काफी पहले मांग उठ चुकी है लेकिन फिलहाल राहुल गांधी को कांग्रेस की कमान सौंपे जाने की मांग में लगातार इज़ाफ़ा हो रहा है. कांग्रेसी नेता दिग्विजय सिंह ने भी राहुल गांधी को पार्टी अध्यक्ष बनाने की पुरजोर वकालत की है. इसके अलावा दिल्ली में हुई एक बैठक में भी यही मुद्दा काफी सरगर्म रहा.
जहां तक राहुल गांधी द्वारा पार्टी अध्यक्ष का पद संभालने की बात है तो इसका वैसे तो और कोई कारण नजर नहीं आता है लेकिन विशेष तौर पर यह जरूर एहसास होता है कि राहुल गांधी शायद एक बार फिर कांग्रेस की कमान अपने हाथ में इसलिए लेना नहीं चाहते क्योंकि भाजपा कांग्रेस पर वंशवाद की सियासत करने का आरोप लगाती रही है और राहुल गांधी ऐसा नहीं चाहते कि भाजपा एक बार फिर से वंशवाद के नाम पर कांग्रेस को घेरे. एक ओर राहुल गांधी हैं जो यह चाहते हैं कि कांग्रेस के अध्यक्ष की कमान वो नहीं संभाले और उनकी जगह किसी और लीडर को यह मौका मिले तो दूसरी तरफ कांग्रेस के सीनियर नेता यह चाहते हैं कि कांग्रेस का नेतृत्व बेहतर तरह से वर्तमान समय में राहुल गांधी ही कर सकते हैं. क्योंकि राहुल गांधी को पीएम मोदी के सामने एक मजबूत नेता के तौर पर देखा जा रहा है और यह कहना भी गलत नहीं होगा कि राहुल ने समय-समय पर अपनी इस काबिलियत को साबित भी किया है. राहुल गांधी के अलावा उनकी बहन प्रियंका गांधी भी कांग्रेस को मजबूती दिलाने के लिए काफी जोशो खरोश के साथ कार्य कर रही हैं और उनका फोकस देश के सबसे बड़े राज्य यूपी पर है. यहां पर सपा और बसपा का गढ़ रहा है लेकिन उसके बावजूद भी वर्तमान समय में सत्तासीन भाजपा हमेशा से कांग्रेस पर ही हमलावर रहती है. दरअसल इसकी एक बड़ी वजह सियासी जानकारों के मुताबिक यह भी है कि भाजपा यूपी में लगातार कांग्रेस पर सियासी हमलावर होने से सपा और बसपा को एक तरह से कमजोर करने का ही काम कर रही है. क्योंकि भाजपा अच्छी तरह से जानती है कि यूपी में कांग्रेस काफी कमजोरी स्थिति में है और ऐसे में यदि मीडिया की सुर्खियों में सपा और बसपा को रखा जाए तो इससे सपा और बसपा को मजबूती मिलेगी जबकि कांग्रेस को इसका कुछ ख़ास फ़ायदा होने वाला नहीं है. लेकिन भाजपा और कांग्रेस के सियासत के मैदान में आमने-सामने होने से कांग्रेसियों में एक नये जोश का संचार है और वह इस बात को मान चुके हैं कि अभी नहीं तो आने वाले समय में उत्तर प्रदेश में कांग्रेस जरूर मजबूती के साथ उभरेगी. कांग्रेस की यदि हम वर्तमान स्थिति पर बात करें तो कांग्रेस के सामने कई तरह की चुनौतियां हैं. कई बार उसे अपने नेताओं के बयान भी उलझन में डाल देते हैं कई बार कांग्रेस के ही कई नेता ऐसे बयान दे देते हैं जो खुद पार्टी पर भारी पड़ते हैं. जहां तक राहुल और प्रियंका की बात है तो इसमें कोई दो राय नहीं है कि दोनों इस समय काफी सरगर्मी से सियासत में जुटे हुए हैं और जब भी राहुल गांधी या प्रियंका गांधी भाजपा पर राजनीतिक हमला बोलते हैं तो उसका जवाब देने के लिए प्रधानमंत्री से लेकर भाजपा के कई सीनियर नेता तक मैदान में उतर जाते हैं और राहुल और प्रियंका गाँधी के आरोपों पर पलटवार करते हैं. फिलहाल जिस तरह की मांग राहुल गांधी को कांग्रेस अध्यक्ष बनाने की उठ रही है तो ऐसे में राहुल गांधी को पार्टी नेताओं के जज्बातों का सम्मान करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष पद की कमान संभाल लेनी चाहिए. क्योंकि फिलहाल कांग्रेस में ऐसा कोई नेता नजर नहीं आता जो राहुल की तरह भाजपा नेताओं को जवाब देने में सक्षम हो. राहुल गांधी को किसी समय कमजोर नेता के तौर पर पेश किया जाता था लेकिन आज यह हकीकत है कि राहुल गांधी एक मजबूत नेता के तौर पर सामने आए हैं और वह तजुर्बेकार/कुशल नेता कहलाए जा रहे हैं क्योंकि राहुल गांधी ने काफी समय तक बुनियादी तौर पर कार्यक्रम कर पार्टी को मजबूत करने के जो प्रयास किए हैं वह काफी काबिले तारीफ हैं और यदि इसी तरह से राहुल गांधी पूरे जोशो खरोश के साथ डटे रहे तो कांग्रेस अपने खराब दौर से काफी हद तक निकलने में सफलता हासिल कर सकती है. हालांकि राहुल के बारे में एक बात यह भी कही जाती रही है कि वह कभी-कभी ही सियासी तौर पर सामने आते हैं और कोई बयान वगैरह देकर अचानक से गायब हो जाते हैं और फिर काफी समय तक वह खामोशी अख्तियार किए रहते हैं. शायद यही वजह है कि राहुल गांधी को कांग्रेस के ज्यादातर सीनियर नेता पार्टी अध्यक्ष पद की कमान सौंपने के हक़ में है.जिससे राहुल गांधी पर जिम्मेदारी आ जाए और इस जिम्मेदारी को वह पूरे जोशो खरोश और जज्बे के साथ निभाते हुए कांग्रेस को अपने सबसे खराब दौर से निकालने के लिए हर संभव प्रयास करें.

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