नफ़रत भरे कंटेंट के ख़िलाफ़ फेसबुक कर्मचारियों का पत्र

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क्या फेसबुक की ओर से उठाया जाएगा कोई क़दम

(शिब्ली रामपुरी)
कई बार ऐसी खबरें सामने आई कि जिन से पता चला कि कई सेलिब्रिटी सोशल मीडिया के कई प्लेटफार्म को अलविदा कह चुके हैं. पहले तो यह लगता था कि शायद इन सेलिब्रिटीज फिल्म स्टार. क्रिकेटर आदि के पास समय नहीं है जो वह अपना समय सोशल मीडिया के किसी प्लेटफार्म पर बिता सकें. लेकिन जब उनके कमेंट पढ़े और उन्होंने सोशल मीडिया छोड़ने का जो कारण बताया उससे साफ हुआ कि सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ जिस तरह के नफरत भरी बातें कही गई उनको ट्रॉल किया गया उनके खिलाफ लिखा गया. यहां तक कि गालियां तक दी गई और इतना ही नहीं अभी कुछ दिन पहले एक मशहूर अभिनेत्री पूजा भट्ट ने तो यहां तक कहा था कि उनको रेप करने तक की धमकी और गंदी गंदी गालियां सोशल मीडिया के प्लेटफार्म पर दी गई जिसके बाद उन्होंने उससे किनारा कर लिया. यह सब बातें सामने ही थी कि कुछ समय पहले कुछ ऐसे मामले हुए कि जिनसे माहौल बिगड़ गया और दंगे फसाद जैसी स्थिति पैदा हो गई. अब एक बहुत ही अहम खबर सामने आई है उसके मुताबिक फेसबुक के दुनियाभर के कई मुस्लिम कर्मचारियों ने उनके समुदाय के प्रति सोशल नेटवर्किंग साइट की चुप्पी पर विरोध जताते हुए एक पत्र लिखा है. फेसबुक के मुस्लिम कर्मचारियों ने फेसबुक के मुस्लिम विरोधी होने की शीर्ष अधिकारियों से शिकायत की है और भारत में फेसबुक पिछले कुछ समय से काफी विवादों में घिरा हुआ है इसका जिक्र भी पत्र में किया गया है. इन मुस्लिम कर्मचारियों के पत्र लिखने से फेसबुक कंपनी के अंदर एक तरह की हलचल मची हुई है और उसे शांत करने के प्रयास भी लगातार किए जा रहे हैं. फेसबुक अधिकारियों को लिखे पत्र में इन कर्मचारियों ने कई बातों का उल्लेख किया. उन्होंने बीते कुछ समय में जिस तरह की घटनाएं सामने आई है उन्हें देखकर निराशा व्यक्त की और कहा है कि इस पूरी प्रक्रिया में हम अकेले नहीं हैं समूह के तमाम कर्मचारी इस मुद्दे पर ऐसे ही विचार रखते हैं इसके बाद पत्र में लिखा गया है कि फेसबुक में काम करने वाले कर्मचारी जानना चाहते हैं जो कुछ हो रहा है क्या वह सही है? पत्र के मुताबिक फेसबुक पर इस तरह का मुस्लिम विरोधी कंटेंट का मौजूद होना निराश करता है. यह दिखाता है कि दुनिया के सबसे बड़े संस्थान की मुस्लिमों के प्रति सहानुभूति ही नहीं है. ऐसा नहीं है कि फेसबुक ने इस पर अपनी बात नहीं रखी उसने अपना पक्ष रखते हुए इसे खुली और स्वतंत्र संस्कृति का उदाहरण बताया. फेसबुक ने अपने पक्ष रखने में जो बातें कही हैं उनसे संतुष्ट नहीं हुआ जा सकता है क्योंकि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर किसी को इतनी खुली छूट नहीं दी जा सकती है कि वह एक दूसरे के मजहब पर अनाप-शनाप लिखे कमेंट करें या कुछ अजीबो गरीब फोटो पोस्ट करे. लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की भी एक सीमा तय की गई है यदि कोई उससे बाहर निकल कर कोई काम करता है तो वह अपराध की श्रेणी में आ जाएगा. फेसबुक बेशक एक काबिले तारीफ प्लेटफॉर्म है यह अपनी बात कहने और दूरदराज बैठे लोगों से संपर्क करने का बेहतर माध्यम है. लेकिन वहीं जिस तरह से पिछले कुछ समय से फेसबुक का इस्तेमाल कुछ असामाजिक तत्व माहौल खराब करने में कर रहे हैं वह बेहद अफसोसनाक है और इस तरफ कंपनी को गंभीरता से ध्यान देकर सख्त कदम उठाने की जरूरत है. अब यह देखना जरूरी है कि इस पत्र के बाद फेसबुक कंपनी क्या सख्त कदम उठाती है और क्या वह अपनी पॉलिसी में कोई सुधार करती है और फेसबुक पर जो नफरत भरे पोस्ट किए जाते हैं क्या उन पर पूरी तरह से लगाम कसने की दिशा में कार्य किया जाएगा.

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