क्या शशि थरूर की सलाह मानेगी कांग्रेस?

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                    (शिब्ली रामपुरी)
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने कांग्रेस को सलाह दी है कि वह बीजेपी जैसा बनने की कोशिश ना करे वरना कांग्रेस ज़ीरो हो जाएगी. थरूर ने स्पष्ट शब्दों में कांग्रेस पार्टी को मशवरा देते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी भाजपा का नरम रूप बनने का जोखिम नहीं उठा सकती क्योंकि ऐसा अगर कांग्रेस करती है तो इससे कांग्रेस के खत्म होने का खतरा है. थरूर ने कहा कि उनकी पार्टी भाजपा के राजनीतिक संदेश का कमजोर रूप पेश नहीं करती है. उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस किसी भी रूप और आकार में भाजपा की तरह नहीं है तथा हमें ऐसे किसी का भी कमजोर रूप बनने की कोशिश नहीं करनी चाहिए जो कि हम नहीं हैं. मेरे विचार से हम ऐसा कर भी नहीं रहे हैं. शशि थरूर ने यह बात ऐसे समय में की है कि जब कांग्रेस लगातार अपने सबसे खराब दौर से निकलने की कोशिशें कर रही है. लेकिन अभी तक भी वह भाजपा के सामने एक मजबूत विपक्ष नहीं बन सकी है यह भी एक कड़वी सच्चाई है जिसे कांग्रेस को समझने की जरूरत है. शशि थरूर ने यह बात ऐसे ही नहीं कही है. दरअसल यदि हम कांग्रेस के पिछले कुछ वर्षों पर गौर करें तो यह बात कहीं ना कहीं एहसास कराती है कि कांग्रेस भाजपा के हिंदुत्व की बजाय नरम हिंदुत्व के सहारे आगे बढ़ने की कहीं ना कहीं कोशिश करती जरूर नजर आती है. गुजरात के विधानसभा चुनाव में राहुल गांधी का एक नया रूप लोगों को देखने को मिला था. जिससे यह बात कही जाने लगी थी कि कांग्रेस भाजपा की राह पर चल पड़ी है और वह भी हिंदुत्व के सहारे अपनी सियासी नैया पार लगाने के प्रयास में है. काफी वक्त पहले कांग्रेस की अध्यक्षा सोनिया गांधी ने दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान यह बात कही थी कि कांग्रेस को मुस्लिम हमदर्द होने के आरोप से बहुत नुकसान हुआ है. उनके मुताबिक कांग्रेस पर मुस्लिम हमदर्दी की वजह से मुस्लिम तुष्टीकरण के आरोप लगते रहे और इसका कांग्रेस को काफी खामियाजा भी भुगतना पड़ा. वैसे देखा जाए तो कांग्रेस ने मुस्लिमों के लिए सत्ता में रहते हुए ऐसा कुछ नहीं किया कि जिसकी वजह से यह कहा जाए कि वह मुस्लिम हमदर्द है कांग्रेस ने न जाने कितनी घोषणाएं तो जरूर मुस्लिम हितों को देखते हुए की लेकिन वह सिर्फ वोट लेने का माध्यम तक ही सीमित रही. जिसका नतीजा यह हुआ कि कांग्रेस धीरे-धीरे सत्ता से दूर होती चली गई और आज कांग्रेस किस स्थिति में है इसके बारे में ज्यादा कुछ लिखने और बताने की जरूरत नहीं है. दरअसल कांग्रेस को यह लगता था कि मुस्लिम वोट उसकी झोली के अलावा कहीं और नहीं जा सकते हैं लेकिन जब दिल्ली में आम आदमी पार्टी वजूद में आई तब मुसलमानों को एक विकल्प मिल गया और उन्होंने आप के माध्यम से इस विकल्प को चुनना बेहतर समझा और कांग्रेस को दिल्ली में भारी शिकस्त का सामना करना पड़ा. कांग्रेस की मुस्लिमों के मामले में दोहरी नीति की वजह से कांग्रेस को काफी नुकसान उठाना पड़ा. यहां यह कहने में भी कोई संकोच नहीं है कि कांग्रेस में कई ऐसे नेता रहे हैं कि जिनका नजरिया साफ तौर पर मुस्लिम विरोधी नजर आता था. ऐसे में शशि थरूर का यह बयान पूरी तरह से सही ही माना जाएगा कि बीजेपी लाइट बनने के चक्कर में कांग्रेस जीरो हो जाएगी. शशि थरूर ने यह बात बहुत ही गहराई से सोचने और समझने के बाद कही है. दरअसल वर्तमान समय में कांग्रेस की स्थिति पर गौर करें तो कांग्रेस दो कश्तियों में सवार होती नजर आती है एक ओर वह मुस्लिम हमदर्दी में कोई कसर बाकी नहीं रखती तो दूसरी और वह भाजपा की तरह की राजनीति भी करने में प्रयासरत रहती है जिसके कारण कांग्रेस नरम हिंदुत्व के सहारे अपनी सियासी नैया पार लगाने में हर मुमकिन प्रयास करती नजर आती है. कांग्रेस पार्टी यह बखूबी जानती है कि वह भाजपा की तरह तो सियासी नजरिया इख़्तियार नहीं कर सकती है लेकिन इतना जरूर है कि यदि वह ऐसा कोई भी कार्य नहीं करना चाहती कि जिससे बहुसंख्यक वोट उससे नाराज हो सके. कांग्रेस की मंशा यही है कि उससे मुस्लिम वोट भी ना छिटके और बहुसंख्यक वर्ग का बड़ा वोट भी उसकी झोली में आ जाए. इसी के सहारे कांग्रेस अपने राजनीतिक वनवास से मुक्ति चाहती है लेकिन क्या ऐसा संभव हो पाएगा? कांग्रेस पार्टी में शशि थरूर जैसे नेताओं की मानें तो कांग्रेस के लिए ऐसा करना खुद को खत्म करने के समान ही होगा. अब देखना यह है कि क्या कांग्रेस पार्टी शशी थरूर जैसे सीनियर नेता की सलाह पर कोई अमल करती है या फिर वह उसी रणनीति के तहत राजनीतिक जमीन मजबूत करने के लिए प्रयासरत रहेगी कि जिसके सहारे कांग्रेस सियासी वनवास को खत्म करना चाहती है. कांग्रेस के सामने इस समय काफी चुनौतियां हैं एक चुनौती उसे अपने अल्पसंख्यक खासतौर पर मुस्लिम वोटों को बनाएं और बचाए रखना है तो दूसरी और उसे बहुसंख्यक का वोट भी चाहिए तो तीसरी चुनौती कांग्रेस के सामने यह है कि उसके अंदरूनी झगड़े भी निपट जाए और पार्टी एकजुट हो जाएं क्योंकि कई बार ऐसे समाचार भी आते रहे हैं कि कांग्रेस के भीतर कई ऐसे नेता है जो कांग्रेस से किसी ना किसी तरह से नाराज हैं और ऐसा कुछ वक्त पहले चिट्ठी विवाद से भी सामने आ चुका है.

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